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    01.10.2026: भविष्यवेधी तंत्रज्ञानाला मानवी चेहरा असावा; तंत्रज्ञानाचा लाभ अंतिम व्यक्तीपर्यंत पोहोचावा: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

    प्रकाशित तारीख : October 1, 2026
    Governor presides over a meeting of the Vice Chancellors’ Futuristic Technology Forum

    भविष्यवेधी तंत्रज्ञानाला मानवी चेहरा असावा; तंत्रज्ञानाचा लाभ अंतिम व्यक्तीपर्यंत पोहोचावा: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सायन्स आदी भविष्यवेधी तंत्रज्ञानाला मानवी चेहरा असावा व तंत्रज्ञानाचा लाभ समाजातील अंतिम व्यक्तीपर्यंत पोहोचावा अशी अपेक्षा राज्यपाल तथा सार्वजनिक विद्यापीठांचे कुलपती जिष्णु देव वर्मा यांनी आज येथे कुलगुरूंशी बोलताना व्यक्त केली.

    राज्यपाल देव वर्मा यांच्या अध्यक्षतेखाली कुलगुरुंची ‘भविष्यवेधी तंत्रज्ञान’ गटाची (Futuristic Technology Forum) बैठक आज लोकभवन मुंबई येथे संपन्न झाली, त्यावेळी राज्यपाल बोलत होते.

    बैठकीला भविष्यवेधी तंत्रज्ञान गटाचे प्रमुख शिवाजी विद्यापीठाचे कुलगुरु डॉ राजनीश कामत, सीओईपी तंत्रज्ञान विद्यापीठाचे कुलगुरु डॉ सुनील भिरूड व डॉ बाबासाहेब आंबेडकर तंत्रशास्त्र विद्यापीठाचे प्रा. अरविंद किवळेकर तसेच इतर अध्यापक उपस्थित होते.

    विकसित भारत संकल्पना प्रत्यक्षात आणण्यासाठी भविष्यवेधी तंत्रज्ञान हा महत्वाचा विषय असून तो राज्यातील सर्व विद्यापीठांपर्यंत पोहोचवण्यासाठी विद्यापीठांमध्ये परस्पर सहकार्य आवश्यक आहे असे प्रतिपादन राज्यपालांनी यावेळी केले. भविष्यवेधी तंत्रज्ञानाच्या मदतीने शिक्षण, आरोग्य, रोजगार सर्वसमावेशक व्हावे अशी अपेक्षा राज्यपालांनी यावेळी व्यक्त केली.

    उच्च शिक्षणात एआय तंत्रज्ञानामुळे शिक्षण संवादी स्वरूपाचे होईल. लोकसंख्येच्या तुलनेत देशातील डॉक्टरांची कमतरता लक्षात घेता आरोग्य क्षेत्रात एआयमुळे अचूक रोगनिदान करणे शक्य होईल व त्याचा लाभ शहरी तसेच ग्रामीण भागातील जनतेला होईल असे राज्यपालांनी सांगितले.

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्रज्ञानामुळे विस्मृतीसारख्या आजाराची पूर्वसूचना मिळू शकेल तसेच ड्रग संशोधनात देखील मदत होईल असे राज्यपालांनी सांगितले.

    लॉजिस्टिकस क्षेत्र आज फार मोठे वाढले असून या क्षेत्रात कृत्रिम बुद्धिमत्तेमुळे समुद्रमार्गे होणाऱ्या माल वाहतुकीवर प्रत्येक पातळीवर लक्ष ठेवता येईल व माल गंतव्य ठिकाणी पोहोचण्याचा वेळ निर्धारित करता येईल असे राज्यपालांनी सांगितले.

    यावेळी भविष्यवेधी तंत्रज्ञान गटाचे प्रमुख डॉ राजनीश कामत यांनी गटाच्या शिफारसी राज्यातील विद्यापीठांना २०३० पर्यंत विकसित होणाऱ्या तंत्रज्ञानासाठी तयार करेल असे सांगितले. तंत्रज्ञानाचा उपयोग जबाबदारीने करण्याबाबत देखील मार्गदर्शन होईल असे त्यांनी सांगितले.

    यावेळी सीओईपी विद्यापीठाचे कुलगुरु डॉ सुनील भिरूड यांनी ‘आरोग्य क्षेत्रात एआय’ या विषयावर तर ‘बाटु’ येथील प्रा. अरविंद किवळेकर यांनी लॉजिस्टिकस विषयातील एआय या विषयावर सादरीकरण केले.

    राज्यपालांच्या हस्ते डेटा सायन्सवरील पुस्तकाचे प्रकाशन

    यावेळी राज्यपालांच्या हस्ते झेवियर इन्स्टिट्यूट ऑफ इंजिनिअरिंग येथील प्रा जॉन रोज यांनी टोकियो येथील सोफिया विद्यापीठातील संशोधकांच्या सहकार्याने लिहिलेल्या ‘जॉय ऑफ पायथॉन: फाउंडेशन्स ऑफ डेटा सायन्स’ या पुस्तकाचे प्रकाशन करण्यात आले.

    यावेळी पुस्तकाचे सहलेखक जॉन मुकुलु व टॅड गोन्साल्विस हे देखील उपस्थित होते.

    भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी को मानवीय दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए; प्रौद्योगिकी का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

    मुंबई, 1 अक्टूबर: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा साइंस जैसी भविष्यवेधी प्रौद्योगिकियों का विकास मानवीय दृष्टिकोण के साथ होना चाहिए तथा इन प्रौद्योगिकियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन महाराष्ट्र के राज्यपाल तथा सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री जिष्णु देव वर्मा ने आज यहाँ किया।

    राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा की अध्यक्षता में आज लोक भवन, मुंबई में कुलपतियों के ‘भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी मंच’ (Futuristic Technology Forum) की बैठक आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने में भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों तक इस विषय को प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए विश्वविद्यालयों के बीच परस्पर सहयोग और ज्ञान का आदान-प्रदान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर अधिक समावेशी बनाए जाने चाहिए।

    बैठक में भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी समूह के प्रमुख एवं शिवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रजनीश कामत, सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुनील भिरूड, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रा. अरविंद किवळेकर तथा अन्य अध्यापक उपस्थित थे।

    उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से शिक्षण अधिक संवादात्मक और प्रभावी हो सकता है, ऐसा राज्यपाल ने कहा। देश में जनसंख्या की तुलना में चिकित्सकों की उपलब्धता को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में AI के माध्यम से अधिक सटीक रोग-निदान संभव हो सकता है तथा इसका लाभ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की जनता को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से विस्मृति जैसे रोगों के प्रारंभिक संकेतों की पहचान करने के साथ-साथ दवा अनुसंधान में भी सहायता मिल सकती है।

    लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी AI के व्यापक उपयोग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समुद्री मार्ग से होने वाले माल परिवहन की विभिन्न प्रक्रियाओं पर AI की सहायता से निगरानी रखी जा सकती है तथा माल के गंतव्य तक पहुँचने के समय का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।

    भविष्यवेधी प्रौद्योगिकी समूह के प्रमुख डॉ. रजनीश कामत ने कहा कि समूह की सिफारिशों के माध्यम से राज्य के विश्वविद्यालयों को वर्ष 2030 तक विकसित होने वाली नई प्रौद्योगिकियों के लिए तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग के संबंध में भी विश्वविद्यालयों को मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

    इस अवसर पर सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुनील भिरूड ने ‘स्वास्थ्य क्षेत्र में AI’ विषय पर तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रा. अरविंद किवळेकर ने ‘लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में AI’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया।

    राज्यपाल के हस्ते डेटा साइंस पर पुस्तक का विमोचन

    इस अवसर पर राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा के हस्ते जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के प्रा. जॉन रोज द्वारा टोक्यो स्थित सोफिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के सहयोग से लिखित ‘जॉय ऑफ पायथॉन: फाउंडेशन्स ऑफ डेटा सायन्स’ पुस्तक का विमोचन किया गया।

    इस अवसर पर पुस्तक के सह-लेखक जॉन मुकुलु और टेड गोंसाल्विस भी उपस्थित थे।